---Advertisement---

मेरी दर्द भरी कहानी….

By GyroTech Job

Updated on:

मैं 12 साल की थी जब मेरे पापा ने माँ को तलाक दे दिया। उनके जाने के बाद मेरी दुनिया जैसे उजड़ गई। पापा ने जल्द ही दूसरी शादी कर ली। मेरी सौतेली माँ, शांति, अपने 20 साल के बेटे रवि के साथ हमारे घर आ गई। रवि लंबा, दुबला-पतला नौजवान था, लेकिन उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जो मुझे डराता था। वह मुझे हमेशा ऊपर से नीचे गंदी नजरों से घूरता। मैं अपने ही घर में असहज थी। रात को अपने कमरे में दरवाजा बंद करके सोती, फिर भी डर मेरे पीछे लगा रहता।


एक रात, जब बिजली चली गई और घर अंधेरे में डूब गया, मैं अपने कमरे में किताब पढ़ रही थी। मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में अचानक दरवाजे पर एक आहट हुई। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने सोचा शायद हवा का झोंका है, लेकिन तभी दरवाजा धीरे से खुला। रवि अंदर आया, उसकी आँखों में वही डरावनी चमक थी। मैंने चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन मेरी आवाज गले में अटक गई। वह करीब आया और बोला, “डर मत, मैं बस बात करने आया हूँ।”

ट्विस्ट 1: लेकिन उसकी बातों में कुछ अजीब था। वह नशे में नहीं था, जैसा मैंने सोचा था। उसने धीमी आवाज में कहा, “मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मेरी माँ… वो कुछ छिपा रही है।” मैं हैरान थी। रवि ने बताया कि उसकी माँ, शांति, कोई साधारण औरत नहीं थी। वह एक गुप्त संगठन से जुड़ी थी, जो बच्चों को गायब करने का धंधा करता था। मुझे यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसने एक पुराना डायरी दिखाया, जिसमें कुछ बच्चों के नाम और तारीखें लिखी थीं। आखिरी नाम मेरा था।


मैं डर के मारे काँप रही थी। रवि ने कहा, “मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ, लेकिन हमें जल्दी करना होगा।” उसकी आवाज में डर था, लेकिन क्या मैं उस पर भरोसा कर सकती थी? मैंने हिम्मत जुटाई और उससे पूछा, “तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो?” उसने बताया कि वह खुद उस संगठन का शिकार रहा था, और अब वह अपनी माँ के खिलाफ खड़ा होना चाहता था। यह सुनकर मेरे मन में उलझन थी। क्या वह सच कह रहा था, या यह कोई जाल था?

ट्विस्ट 2: अगले दिन, मैंने चुपके से शांति की अलमारी में उस डायरी को ढूंढा। वहाँ मुझे न केवल डायरी मिली, बल्कि एक पुराना लॉकेट भी, जिसमें मेरी माँ की तस्वीर थी। मेरी माँ! यह कैसे संभव था? क्या शांति मेरी माँ को पहले से जानती थी? मैंने रवि को यह बात बताई। उसने कहा कि शायद मेरी माँ को तलाक के पीछे कोई बड़ा राज था। हमने मिलकर शांति की जासूसी शुरू की।


एक रात, जब शांति कहीं बाहर गई थी, हमने उसके कमरे में एक गुप्त तहखाना ढूंढा। वहाँ कुछ फाइलें थीं, जिनमें मेरे पापा का नाम भी था। पता चला कि पापा भी इस संगठन का हिस्सा थे। मेरा दिल टूट गया। जिन पापा पर मुझे भरोसा था, वे मुझे बेचने की साजिश में शामिल थे। रवि ने कहा, “हमें पुलिस को बताना होगा, लेकिन पहले हमें सबूत चाहिए।”


अंत: हमने हिम्मत जुटाई और स्थानीय पुलिस को सबूत सौंपे। शांति और पापा को गिरफ्तार कर लिया गया। रवि ने मुझे अपने चाचा के घर भेजा, जहाँ मैं सुरक्षित थी। उस रात के बाद, मैंने सीखा कि डर के बावजूद हिम्मत करना कितना जरूरी है। रवि, जो पहले मुझे डरावना लगता था, मेरा सबसे बड़ा सहारा बन गया। मेरी जिंदगी फिर से शुरू हुई, लेकिन अब मैं हर कदम पर सतर्क थी।

मेरी दर्द भरी कहानी….

On: September 24, 2025 |
205 Views
---Advertisement---

मैं 12 साल की थी जब मेरे पापा ने माँ को तलाक दे दिया। उनके जाने के बाद मेरी दुनिया जैसे उजड़ गई। पापा ने जल्द ही दूसरी शादी कर ली। मेरी सौतेली माँ, शांति, अपने 20 साल के बेटे रवि के साथ हमारे घर आ गई। रवि लंबा, दुबला-पतला नौजवान था, लेकिन उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जो मुझे डराता था। वह मुझे हमेशा ऊपर से नीचे गंदी नजरों से घूरता। मैं अपने ही घर में असहज थी। रात को अपने कमरे में दरवाजा बंद करके सोती, फिर भी डर मेरे पीछे लगा रहता।


एक रात, जब बिजली चली गई और घर अंधेरे में डूब गया, मैं अपने कमरे में किताब पढ़ रही थी। मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में अचानक दरवाजे पर एक आहट हुई। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने सोचा शायद हवा का झोंका है, लेकिन तभी दरवाजा धीरे से खुला। रवि अंदर आया, उसकी आँखों में वही डरावनी चमक थी। मैंने चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन मेरी आवाज गले में अटक गई। वह करीब आया और बोला, “डर मत, मैं बस बात करने आया हूँ।”

ट्विस्ट 1: लेकिन उसकी बातों में कुछ अजीब था। वह नशे में नहीं था, जैसा मैंने सोचा था। उसने धीमी आवाज में कहा, “मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मेरी माँ… वो कुछ छिपा रही है।” मैं हैरान थी। रवि ने बताया कि उसकी माँ, शांति, कोई साधारण औरत नहीं थी। वह एक गुप्त संगठन से जुड़ी थी, जो बच्चों को गायब करने का धंधा करता था। मुझे यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसने एक पुराना डायरी दिखाया, जिसमें कुछ बच्चों के नाम और तारीखें लिखी थीं। आखिरी नाम मेरा था।


मैं डर के मारे काँप रही थी। रवि ने कहा, “मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ, लेकिन हमें जल्दी करना होगा।” उसकी आवाज में डर था, लेकिन क्या मैं उस पर भरोसा कर सकती थी? मैंने हिम्मत जुटाई और उससे पूछा, “तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो?” उसने बताया कि वह खुद उस संगठन का शिकार रहा था, और अब वह अपनी माँ के खिलाफ खड़ा होना चाहता था। यह सुनकर मेरे मन में उलझन थी। क्या वह सच कह रहा था, या यह कोई जाल था?

ट्विस्ट 2: अगले दिन, मैंने चुपके से शांति की अलमारी में उस डायरी को ढूंढा। वहाँ मुझे न केवल डायरी मिली, बल्कि एक पुराना लॉकेट भी, जिसमें मेरी माँ की तस्वीर थी। मेरी माँ! यह कैसे संभव था? क्या शांति मेरी माँ को पहले से जानती थी? मैंने रवि को यह बात बताई। उसने कहा कि शायद मेरी माँ को तलाक के पीछे कोई बड़ा राज था। हमने मिलकर शांति की जासूसी शुरू की।


एक रात, जब शांति कहीं बाहर गई थी, हमने उसके कमरे में एक गुप्त तहखाना ढूंढा। वहाँ कुछ फाइलें थीं, जिनमें मेरे पापा का नाम भी था। पता चला कि पापा भी इस संगठन का हिस्सा थे। मेरा दिल टूट गया। जिन पापा पर मुझे भरोसा था, वे मुझे बेचने की साजिश में शामिल थे। रवि ने कहा, “हमें पुलिस को बताना होगा, लेकिन पहले हमें सबूत चाहिए।”


अंत: हमने हिम्मत जुटाई और स्थानीय पुलिस को सबूत सौंपे। शांति और पापा को गिरफ्तार कर लिया गया। रवि ने मुझे अपने चाचा के घर भेजा, जहाँ मैं सुरक्षित थी। उस रात के बाद, मैंने सीखा कि डर के बावजूद हिम्मत करना कितना जरूरी है। रवि, जो पहले मुझे डरावना लगता था, मेरा सबसे बड़ा सहारा बन गया। मेरी जिंदगी फिर से शुरू हुई, लेकिन अब मैं हर कदम पर सतर्क थी।

Share

GyroTech Job

सुशील कुमार एक अनुभवी लेखक और सरकारी नौकरियों के जानकार हैं। उन्होंने सरकारी नौकरियों से संबंधित कई लेख और ब्लॉग लिखे हैं। उनका लक्ष्य सरकारी नौकरी चाहने वालों को सही जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करना है।

Leave a Comment